प्रिय साथियों,
आज हम एक ऐसे विषय पर विचार करेंगे, जो बाहर से बहुत आकर्षक लगता है, लेकिन भीतर से जीवन को उलझा देता है। यह विषय है — बुद्धि-विलास। कई बार हम समझते हैं कि अधिक चतुर होना, हर बात में तर्क करना, दूसरों को अपनी बुद्धि से प्रभावित करना ही सफलता है। पर वास्तव में यही प्रवृत्ति धीरे-धीरे हमारे सुख और शांति को छीन लेती है।
बुद्धि-विलास क्या है?
जब मनुष्य अपनी बुद्धि का उपयोग सत्य, करुणा और कल्याण के लिए न करके केवल दिखावे, अहंकार, अनावश्यक बहस, चालाकी या दूसरों को नीचा दिखाने के लिए करता है, तो उसे बुद्धि-विलास कहा जाता है।
सरल शब्दों में कहें तो —
> बुद्धि का उपयोग साधन की जगह भोग बन जाए, वही बुद्धि-विलास है।
बुद्धि-विलास मानव जीवन के लिए सही क्यों नहीं है?
बुद्धि-विलास जीवन में कई तरह की परेशानियाँ लाता है—
1. अहंकार को बढ़ाता है
व्यक्ति खुद को सबसे समझदार मानने लगता है, जिससे रिश्तों में दूरी आ जाती है।
2. मन को अशांत करता है
हर समय अपनी बात साबित करने की बेचैनी मानसिक तनाव पैदा करती है।
3. जीवन को जटिल बनाता है
जहाँ सरल समाधान होना चाहिए, वहाँ चालाकी और भ्रम आ जाते हैं।
4. विवेक को कमजोर करता है
अधिक चतुर दिखने की चाह में सही निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है।
एक सरल उदाहरण
एक गाँव में दो व्यक्ति रहते थे।
पहला व्यक्ति हर बात में तर्क करता, लोगों की गलतियाँ निकालता और अपनी बुद्धि दिखाता रहता। दूसरा व्यक्ति कम बोलता, ध्यान से सुनता और जरूरत पड़ने पर ही सलाह देता।
समय के साथ पहला व्यक्ति अकेला पड़ गया, क्योंकि लोग उससे बहस से बचने लगे। दूसरा व्यक्ति सबका प्रिय बन गया, क्योंकि उसकी बातों में अहंकार नहीं, समाधान होता था।
यह अंतर बुद्धि-विलास और विवेक का था।
बुद्धि-विलास से कैसे बचा जाए?
अब प्रश्न है — इससे बचने का उपाय क्या है?
1. विनम्रता अपनाएँ
विनम्र बुद्धि कभी विलास नहीं बनती।
2. मौन का अभ्यास करें
हर बात पर बोलना आवश्यक नहीं। कभी-कभी चुप रहना ही समझदारी है।
3. बुद्धि को सेवा में लगाएँ
अपनी समझ का उपयोग दूसरों की मदद के लिए करें, दिखावे के लिए नहीं।
4. आत्मचिंतन करें
खुद से पूछें — “क्या मैं सही होना चाहता हूँ या शांत रहना?”
बुद्धि-विलास से बचने के फायदे
जब व्यक्ति बुद्धि-विलास से दूर रहता है—
मन शांत और स्थिर रहता है
रिश्ते मधुर बनते हैं
निर्णय अधिक सही होते हैं
आत्मसम्मान बढ़ता है
जीवन में संतुलन आता है
बुद्धि-विलास से बचकर जीवन कैसे सुखी हो सकता है?
प्रिय साथियों,
सुख का रास्ता अधिक जानने से नहीं, सही ढंग से जीने से बनता है।
जब बुद्धि अहंकार से मुक्त होती है, तब जीवन बोझ नहीं रहता। व्यक्ति दूसरों को जीतने की जगह स्वयं को सुधारने लगता है। यही सच्चा सुख है।
निष्कर्ष
बुद्धि ईश्वर का उपहार है, पर उसका विलास नहीं, विवेकपूर्ण उपयोग ही मानव जीवन को सुखी और सफल बनाता है।
यदि हम बुद्धि-विलास से बचें और बुद्धि को करुणा, सेवा और संयम के मार्ग पर लगाएँ, तो जीवन स्वयं ही सरल, शांत और आनंदमय हो जाता है।
> सच्ची बुद्धि वही है, जो अहंकार नहीं, शांति दे।
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